राजस्थान में 59 दिनों से लॉकडाउन जारी है, जो 31 मई तक चलने वाला है। काेरोना से लड़ाई के बीच सबसे जरूरी चीजों जैसे- राशन और भोजन मुहैया कराने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास हो रहे हैं, पर यही तेजी महिलाओं की सबसे बड़ी जरूरत- सैनिटरी पैड्स के लिए भी जरूरी है।
राज्य सरकार ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के जरिए सैनिटरी पैड्स घर-घर पहुंचाने की पहल की है। लेकिन अब भी प्रदेश की करीब 75 लाख महिलाओं और बच्चियों में से कई इससे वंचित हैं।
कर्फ्यूग्रस्त इलाकों की महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान
सबसे ज्यादा परेशानी कर्फ्यूग्रस्त और ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को हो रही है। स्कूल-काॅलेज 64 दिनों से बंद हाेने के कारण लाखों बालिकाओं तक भी पैड्स पहुंचाना मुश्किल हो रहा है।
भास्कर ने जयपुर के 20 स्कूलों में जाकर सैनिटरी पैड्स की स्थिति जानी। इस दौरान यहां करीब एक करोड़ पैड्स कार्टन, अलमारियों और बोरियों में भरे मिले।
इन्हें सबसे ज्यादा तकलीफ
- 50 लाख महिलाएं, जो 400 कर्फ्यूग्रस्त क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में रहती हैं।
- 17 लाख लड़कियां, जो सरकारी स्कूलों में 6वीं से 12वीं में कक्षा में हैं।
- 4.5 लाख लड़कियां, जो गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के परिवारों की हैं।
- 2.8 लाख बालिकाएं, जो राजस्थान के सरकारी कॉलेजों में अध्ययनरत हैं।
इन पत्रों में भी छलका दर्द
नोट- राजस्थान सरकार इन 75 लाख से अधिक महिलाओं व लड़कियों को हर महीने निशुल्क सैनिटरी पैड देती है, पर लॉकडाउन के कारण 59 दिन से पैड नहीं बंट पाए हैं।
सैनिटरी पैड्स उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण विभिन्न जिलों की 15 से ज्यादा बेटियों ने सीएम और अफसरों को पत्र लिखकर अपनी पीड़ा बताई है। गुर्जरों का गुढ़ा गांव की कविता, गोगुंदा की सुनीता और पिंकी खटीक ने मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने की मांग की।
जिम्मेदार बोले- हम पैड्स पहुंचाने की तैयारी कर रहे
हम स्कूल तो नहीं खोल सकते, पर ऐसी तैयारी कर रहे हैं ताकि सैनिटरी पैड्स पहुंच जाएं। माध्यमिक शिक्षा निदेशक को जिला कलेक्टर्स से बात करके ऐसा कार्यक्रम बनाने को कहा है, ताकि पैड्स पहुंचाए जा सकें।
- मंजू राजपाल, स्कूल शिक्षा सचिव
लड़कियोंको स्कूलों में पैड्स उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा सचिव को पत्र लिखा है। वितरण व्यवस्था होते ही नया स्टॉक उपलब्ध करा देंगे।
- कैलाश नारायण मीणा, निदेशक (प्रोक्योरमेंट) आरएमएसएल
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From Dainik Bhaskar
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