आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर से फिल्म निर्माता एकता कपूर ने हार्ट टू हार्ट शृंखला के तहत बातचीत की। उन्हाेंने काेराेनावायरस से लेकर निजी और सार्वजनिक जीवन समेत कई बिंदुओं पर श्री श्री से सवाल किए।
एकता : मैं सिंगल मदर हूं। अपने बेटे को आर्ट ऑफ गिविंग की सीख के साथ बड़ा कर रही हूं, जाे आर्ट ऑफलिविंग है। क्या उसके जीवन में पिता न हाेने का मौका मैं खाे चुकी हूं? क्या मैं कसूरवार हूं?
श्री श्री : आपकाे अपराधी महसूस करने की जरूरत नहीं है। महान ऋषि सत्यकाम काे भी अकेली मां जबाला ने पाला था। वे अपने पिता काे नहीं जानते थे। हमारी संस्कृति में कई माताओं ने बच्चाें काे पाला और महान बनीं।
एकता : मेरे भाई का भी सेराेगेट बच्चा है। लाेग कहते हैं कि हमारी किस्मत ही ऐसी है, जबकि मैं वैवाहिक जीवन व संयुक्त परिवार पर सीरियल बनाती हूं?
श्री श्री : बच्चाें की जरूरताें की पूर्ति करना जरूरी है। उन्हें मार्गदर्शन दें, प्यार करें। आप माता-पिता दाेनाें की भूमिकाएं निभा रही हैं। यह पर्याप्त है। पुराणाेंमें भी ऐसी कहानी है जब भगवान शिव ने मां की भूमिका निभाई थी।
एकता : आप अगले जन्म में विश्वास करते हैं?
श्री श्री : हमें कुछ ऐसी चीजाें पर विश्वास करना चाहिए, जिन्हें हम नहीं जानते।
एकता : काेराेना संयाेग है या...?
श्री श्री : सकारात्मक पहलू देखना चाहिए। कोरोना के बाद लाेगाें ने खुद के भीतर झांकना शुरू कर दिया है। अस्त-व्यस्त जीवनशैली में जीवन के बारे में साेचना शुरू कर दिया है।
एकता: प्यार, पैसा, प्रसिद्धि, सफलता में से किसके पीछे भागना चाहिए?
श्री श्री : किसी के पीछे नहीं। व्यक्ति काे वही बने रहना चाहिए, जाे वह है। बाकी चीजें अपने आप उसके पास आ जाएंगी।
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From Dainik Bhaskar
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