दिसंबर 2019 में चीन की कई लैब्स ने कोरोना के शुरुआती मरीजों के सैंपल नष्ट कर दिए थे। चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के मेडिकल अफसर लियू डेनफेंग ने यह जानकारी दी है। उन्होंने तर्क दिया कि बायोसेफ्टी कारणों से ऐसा करना जरूरी था।
उन्होंने बताया कि देश के कानून के अनुसार कई लैब संक्रामक रोगों के सैंपल्स को संभालने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐेसे संक्रामक रोगों से जुड़े सैंपल्स के स्टोरेज, स्टडी और उन्हें नष्ट करने के सख्त मानक रखे गए हैं। इसलिए या तो उन्हें पेशेवर संस्थानों को सुपुर्द किया जाता है अथवा नष्ट कर दिया जाता है।
शुरुआत में लैब्स ने इसे दूसरी श्रेणी का निमोनिया माना था
शुरुआत में आए इन मामलों को दूसरी श्रेणी का निमोनिया मानकर इलाज का प्रबंध करने का फैसला लिया गया था। फरवरी में ही सरकार ने सैंपल लेने वाली लैब्स को आदेश दिया था कि वे बिना अनुमति के सैंपल किसी भी शोध संस्थान या उन्नत लैब्स को नहीं सौंपेंगे। ये अनाधिकृत लैब्स सैंपल लेकर उन्हें अपने स्तर पर नष्ट कर देतीं थी या नगर पालिकाओं को स्टोरेज के लिए भेज देती थीं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इसी कारण संक्रमण फैला
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसी वजह से संक्रमण बेतहाशा फैला। पर चीन के मेडिकल अफसर इस बात को नहीं मानते। हालांकि, इस कबूलनामे में डेनफेंग ने इन अनाधिकृत लैब्स और उन्होंने सैंपल कैसे लिए इसकी जानकारी साझा नहीं की।
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From Dainik Bhaskar
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