लॉकडाउन में सुसाइड, एंजाइटी और डिप्रेशन के बढ़ते मामले बताते हैं कि बॉडी के साथमेंटल हेल्थ पर भी ध्यान देना उतना ही जरूरी है। डिप्रेशन पर एम्स की ताजा रिसर्च में योग और एलोपैथी के कॉम्बिनेशन से डिप्रेशन में तेजी से सुधार हुआ।
12 हफ्तों तक चली रिसर्च में सामने आया किअगर आनुवांशिक डिप्रेशन से जूझ रहे है तो, दवालेने के साथ योग करने से तेजी से राहत महसूस होती है।
आज विश्व योग दिवस है।इस मौके पररिसर्च में शामिल एम्स दिल्ली के एनॉटमी डिपार्टमेंट की प्रोफेसर डॉ. रीमा दादा नेदैनिकभास्कर को बताया कैसे योग और कुछ दवाओं केकॉम्बिनेशन सेआनुवांशिक डिप्रेशन को भी दूर किया जासकता है।
- 3 पॉइंट : कैसे योग और दवा ने मिलकर घटाया डिप्रेशन
1. रिसर्च को एम्स दिल्ली के सायकियाट्री और एनॉटमी डिपार्टमेंट ने मिलकर किया। सायकियाट्री विभाग में जेनेटिक और दूसरे कारणों से बीमार 160 मरीजों को शोध के लिए चुना गया। इन्हें 80-80 के दो ग्रुप में बांटा गया।
2. इसमें एक ग्रुप को सिर्फ दवाई दी गईजबकि दूसरे को दवाई के साथ योग कराया गया। परिणाम जानने के लिए पहले और रिसर्च पूरी होने के बाद दोनों ग्रुप का ब्लड सैंपल लिया गया।
3. ब्लड सैंपल की रिपोर्ट चौंकाने वाली थी। सिर्फ दवाई लेने वाले मरीजों को 29 फीसदी फायदा दिखाई दिया, जबकि दवाई के साथ12 सप्ताह तक योग करने वाले मरीजों को 60 फीसदी फायदा मिला।
- सूर्य नमस्कार, शवासन,शांति मंत्र और ध्यान कराया गया
डॉ. रीमा दादा के मुताबिक, डिप्रेशन दूर करने के लिए सूर्य नमस्कार, शवासन, उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन, वक्रासन कराने के साथ शांति मंत्र का जापऔर ध्यान भी कराया गया। योग में साबित हुआ है कि ये आसन डिप्रेशन, तनाव और एंग्जायटी को दूर करते हैं। इन आसनों और दवाओं का असर एक से दूसरी पीढ़ी में आने वाले डिप्रेशन में भी देखा गया। जांच रिपोर्ट्स के अलावा मरीजों ने भीइस अनुभव कीपुष्टि करते हुएकहा, हमारे ऊपर योग का असर हुआ है।
दवाओं और योगासनों का कई तरह से दिखा बदलाव
डॉ. रीमा दादा कहती हैं, हमारे दिमाग में ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम के दो भाग होते हैं, सिम्पेथेटिक और पैरासिम्पेथेटिक। योग हमारे पैरासिम्पेथेटिक सिस्टम को एक्टिवेट करता है। ऐसा होने पर हमारा बढ़ा हुआ हार्ट रेट कम होता है, इंसान रिलैक्स महसूस करता है। न्यूरॉन्स बेहतर काम करते हैं और शांति मिलती है।
इस असर को और भी बेहतर तरीके से पता लगाने के लिए रिसर्च में शामिल मरीजों का जेनेटिक और बायोकेमिकल टेस्ट किए गए। इस दौरान एंटी-डिप्रेसेंट दवाओं काडोज भी दिया गया।
डिप्रेशन से लम्बे समय से जूझ रहे मरीज कम समय में ठीक होते हैं
दोनों के असर से ऐसे मरीज जो लम्बे समय से डिप्रेशन से जूझ रहे हैं उनकी दवाओं का डोज घटताहै। इन्हें ठीक होने में कम समय लगता है। जिन्हें ऐसा बार-बार होता है उन मरीजों में डिप्रेशन की गंभीरता घटती है। डॉ. रीमा दादा कहती हैं, डिप्रेशन का इलाज कराने आने वाले मरीजों को यही सलाह दी जाती है कि रोज योग करें। जैसे रोजमर्रा के बाकी काम करते हैं, वैसे ही योग को भी जीवन का जरूरी हिस्सा बनाएं।
4 पॉइंट : आज डिप्रेशन-एंग्जायटी को हराना सबसे जरूरी क्यों?
देश का हाल : द लैंसेट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 2017 तक 19.73 करोड़ लोग किसी न किसी मानसिक बीमारी से जूझ रहे थे। ये आंकड़ा कुल आबादी का कुल आबादी का 15% है। यानी, हर 7 में से 1 भारतीय बीमार है। इनमें से भी 4.57 करोड़ डिप्रेशन और 4.49 करोड़ एंजाइटी का शिकार हैं।
दुनिया की तस्वीर : डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, दुनियाभर में 26 करोड़ से ज्यादा लोग डिप्रेशन से जूझ रहे हैं। 15 से 29 साल की उम्र के लोगों में आत्महत्या की दूसरी सबसे बड़ी वजह डिप्रेशन ही है।
मेंटल हेल्थ के मामले में हम रूस को पीछे छोड़ देंगे
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक भारत में हर साल एक लाख की आबादी पर16लोग मानसिक बीमारी से परेशान होकरआत्महत्या कर लेते हैं। इस मामले में भारत, रूस के बाद दूसरे नंबर पर है। रूस में हर 1 लाख लोगों में से 26लोग सुसाइड करते हैं।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो यानी एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, 2013 से लेकर 2018 के बीच 52 हजार 526 लोगों ने मानसिक बीमारी से तंग आकर आत्महत्या कर ली।
आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
https://ift.tt/2NcemfQ
From Dainik Bhaskar
0 Comments
Please do not enter any Spam Link in the comment box.