बेलारूस में लोग राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको के खिलाफ सड़कों पर हैं। वे 1994 से राष्ट्रपति हैं। लुकाशेंको रूस की मदद और लोकलुभावन वादों के दम पर चुनाव जीतते आ रहे थे, लेकिन कोरोना पर उनके बयानों और लापरवाही से लोगों में नाराजगी है। उन्होंने कहा था कि वोदका पीने, ट्रैक्टर चलाने और स्टीम बाथ से कोरोना नहीं होता।
यहां तक कि लोगों ने चंदे से डॉक्टर और अन्य स्टाफ को मास्क, पीपीई किट मुहैया करवाई। लोग अब एक ब्लॉगर सर्गेई तीखानोव्स्की को राष्ट्रपति बनाना चाहते हैं। सर्गेई ने लुकाशेंकों की नीतियों के विरोध में उन्हें बच्चों की कविता के पात्र की तर्ज पर ‘कॉकरोच’ कहा था। इसके बाद कार पर बड़ी सी स्लीपर यानी चप्पल लगाकर विरोध जताया।
उन्होंने यह संदेश भी दिया कि ‘कॉकरोच को चप्पल से चपटा करना है।’ हालांकि उन्हें जेल भेज दिया गया। अब लोग उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाना चाहते हैं। उनका कहना है कि जब पड़ोसी देश यूक्रेन में कॉमेडियन राष्ट्रपति बन सकता है, तो हमारे यहां ब्लॉगर क्यों नहीं।
लुकाशेंको ने ओपिनियन पोल, मीडिया पर रोक लगा रखी है
लुकाशेंको लोकलुभावन घोषणाएं और विरोधियों का दमन करने में माहिर हैं। चुनाव में उन्हें अयोग्य घोषित करवा देते हैं, जिनसे हार का खतरा होता है। ओपिनियन पोल और मीडिया पर भी पाबंदी है। लेकिन अब लोग उनके खिलाफ सड़कों पर हैं और स्लीपर क्रांति वाले ब्लॉगर में ‘कॉकरोच’ प्रेसिडेंट का विकल्प देख रहे हैं।
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From Dainik Bhaskar
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