राजस्थान कीअलवर सेंट्रल जेल में कैदियों से हफ्ता वसूली का मामला सामने आया है। करीब 25कैदियों का गिरोह नए कैदियों से मारपीट कर उन्हें धमकाता है और उनके परिवार से ऑनलाइन पैसे की वसूली करता है। इस गिरोह का मुखिया गुल्ला गुजर्र है। वसूली की पूरी रकम एक कैदी की गर्लफ्रेंड के खाते में होता है।आरोप है कि जेल प्रशासन की भी इसमें मिलीभगत है।
खाते में हुए 10 हजार से ज्यादा के 23 ट्रांजेक्शन
दैनिक भास्कर ने लगातार 20 दिन तक इस मामले की पड़ताल की तो वसूली की रकम का ऑनलाइन ट्रांजेक्शन होने के पुख्ता सबूत मिले। इनमें 10 हजार रुपए से अधिक के करीब 23 ट्रांजेक्शन हैं। कैदियों से वसूली का पूरा ट्रांजेक्शनपत्नी की हत्या के मामले में सजा काट रहे नवीन दुधानी की गर्लफ्रेंड के खाते में होता है।
कैदी ने जेल प्रशासन पर आरोप लगाया
29 मई को दोपहर 3:22 मिनट पर जेल में बंद एक केदी ने भास्कर रिपोर्टर को मोबाइल पर कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कॉल किया और कहा, मैं अलवर सेंट्रल जेल से बोल रहा हूं, मेरा नाम किसी को मत बताना। जेल प्रशासन ने कुख्यात कैदियों को बाउंसर की तरह नए कैदियों से मारपीट करने का काम सौंपा हुआ है।
पैसे दो तोसिगरेट औरआरओ वॉटर भी मिलता है
जेल में बदमाश कैदियों को मारते-पीटते हैं और बर्तन साफ करवाते हैं। काम नहीं करना है तो इन्हें पैसे देने पड़ते हैं। यह पैसा अपने या रिश्तेदारों के बैंक एकाउंट में डलवाते हैं। जेल प्रशासन पैसे देने वाले कैदियों को बैरक के अंदर आरओ वॉटर, बीड़ी, सिगरेट औरमोबाइल मुहैया करवाते हैं। जेल में ऐशो आराम के कई वीडियो भी वायरल हो चुके हैं।
कैदी को धमकी दी, यहां पैसा देगा तभी आराम से रहेगा
अलवर सेंट्रल जेल के कैदी शिवा महावर ने 9 मई को जेल महानिदेशक को पत्र लिखा था। इसमें बताया गया कि कोरोना संक्रमण के दौरान जयपुर सेंट्रल जेल से 100 कैदियों को अलवर जेल में ट्रांसफर किया गया था, जिसमें वह भी शामिल था। यहां उसके साथ दबंग कैदियों ने मारपीट की। गुल्ला गुर्जर ने उससे कहा कि यहां पैसे देगा, तभी तू लंगर के काम से बच सकता है। गुल्ला ने बैंक आकाउंट कानंबर 2975000100225553 दिया।यह अलवर की शिवाजी पार्क कॉलोनी में स्थित पंजाब नेशनल बैंक का एकाउंट है।
आशु नाम की महिला काखाता, हो रहे बड़े लेन-देन
यह खाता आशु नाम की महिला का है।इस खाते में कईलेन-देन ऐसे हैं जो उसी दिन जमा करवाए गए औरदूसरे खाते में ट्रांसफरकर दिए। आशु का कहना है कि मेरे खाते में जेल से कोई लेन-देन नहीं होता। किसी को कभी डिजिटल लेन-देन की जरूरतहोती है तो मैं मदद कर देती हूं।जब जेल अधीक्षक राजेंद्र कुमार से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा, कोई वीडियो वायरल हुआ था, लेकिन उन्होंने अभी नहीं देखा है।
दो साल पहले एक कैदी 3 दिन घूमकर वापस आ गया था
मई-जून 2018 में इसी जेल में बंद करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोपी दिलीप वर्मा पूरी जेल को मैनेज कर 3 दिन तक राजस्थान समेत अन्य राज्यों में सैर सपाटा कर वापस आया था। खुलासा होने के बाद तत्कालीन जेलर समेत अन्य जेल कर्मियों को ड्यूटी से हटा दिया गया था।
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