अमेरिका के डॉक्टर डेविड फ्रॉली (वामदेव शास्त्री) स्वेच्छा से सनातन परंपरा के छात्र हैं। वे वेद, विज्ञान और ज्योतिष में दक्ष हैं और इन विषयों पर अब तक 30 किताबें लिख चुके हैं। 2015 में डॉ. फ्रॉली को पद्मभूषण से नवाजा गया। हालिया प्रकाशित किताब व्हॉट इज हिन्दूइज्मः ए गाइड फॉर ग्लोबल माइंड चर्चा में है। राम मंदिर निर्माण पर डॉ. फ्रॉली ने भास्कर के रितेश शुक्ल से विशेष बात की। पढ़िए संपादित अंश...
राम मंदिर निर्माण का शुभारंभ इस बात का संकेत है कि भारत न सिर्फ एक आधुनिक राज के तौर पर उभर रहा है, बल्कि वह एक निरंतर धार्मिक सभ्यता के तौर पर फिर से उठ रहा है, जिसकी संपूर्ण विश्व को जरूरत है। भारत के सात सबसे महत्वपूर्ण पवित्र शहरों में अयोध्या भी अपने प्राचीन इतिहास के कारण अग्रणी है।
शायद यही कारण है कि यह वर्तमान और भविष्य में भी, भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए ज्ञान, अध्यात्म और रचनात्मकता का केंद्र बनेगा। राम की जन्मस्थली में उनका मंदिर बनने से निश्चय ही भारत का नया जन्म होगा, जो आने वाले समय में दुनिया में शांति और सम्पन्नता स्थापित करने की दिशा एक अहम भूमिका निभाएगा। यह योगियों की धरा है। यह एकमात्र ऐसी धर्म परंपरा का आधार है जो मानव जाति को सत्य में आनंद खोजना सिखा सकती है।
आज के आधुनिक सूचना युग में राम मंदिर का बनना यह बताता है कि ऋषियों की पावन भूमि जिसे हम आज इंडिया या भारत के नाम से जानते हैं, वो पराधीनता और तोड़-मरोड़ कर पेश किए गए इतिहास की बेड़ियों को तोड़कर अपने मूल रूप में सामने आ रही है।
हर कार्य जनमानस के हितों को ध्यान में रखकर किया
श्रीराम ऐसी जीवनशैली के परिचायक हैं, जो मुश्किल समय में भी बिना डरे सत्य के मार्ग पर चलते हैं। उनका हर कार्य जनमानस के हितों को ध्यान में रखकर किया गया है। जैसे-जैसे मंदिर निर्माण गति पकड़ेगा, विश्व में रामायण की पावन परंपरा पर ध्यान केंद्रित होता जाएगा। दुनिया को ऐसे भारत की जरूरत है जो अपनी सांस्कृतिक विरासत को साथ लेकर चले। समय आ गया है कि भारत के श्रेष्ठ इतिहास को भविष्य को ध्यान में रखते हुए पुनः स्थापित किया जाए। श्रीराम को इतिहास, साहित्य, मर्यादा मार्ग के दर्शन और प्रेरणा के तौर पर जिया जाए।
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From Dainik Bhaskar
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