इंदौर में कोरोना के 1085 मरीज मिल चुके हैं। तीन कैटेगरी के अस्पतालों में डॉक्टर संक्रमण के खतरे के बीच इनका इलाज कर रहे हैं। फिर भी जज्बा ऐसा कि कई डॉक्टरों ने तो मरीजों का इलाज करने की खातिर घर ही छोड़ दिया। कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में अग्रिम माेर्चे के ये सिपाही किस तरह संघर्ष कर रहे हैं, यह अनुभव करने के लिए भास्कर फोटो जर्नलिस्ट ओपी सोनी ने कुछ डॉक्टरों के साथ सुबह से रात तक एक दिन बिताया।
होस्टल में पीपीई पहना

ये हैं अरबिंदो मेडिकल कॉलेज में एनेस्थेसिया एचओडी डॉ. साधना संवत्सरकर। कोरोना के मरीजों के लिए घर छोड़ कॉलेज के होस्टल में रह रही हैं।
अस्पताल पहुंच अपडेट लिया

वे सुबह सात बजे ही कोरोना आईसीयू का राउंड लेने निकल जाती हैं। वहां मरीजों को देखने के बाद उनकी स्थिति को लेकर अन्य डॉक्टरों से चर्चा करती हैं। सवा आठ बजे तक राउंड लेकर होस्टल लौट जाती हैं। नहाकर ब्रेकफास्ट करती हैं। फिर कॉलेज निकल जाती हैं।
कोविड आईसीयू में गंभीर मरीजों का उपचार

वे रात साढ़े नौ बजे फिर से कोरोना आईसीयू का राउंड लेती हैं। एक घंटे वहां रहकर मरीजों की जानकारी लेती हैं। उनके विभाग के एक-एक पीजी डॉक्टर की ड्यूटी भी आईसीयू में लगाई जाती है, जो दिनभर मरीज का अपडेट उन्हें देते हैं।
सोने से पहले बच्चों से बात...

डॉ. साधना होस्टल में लौटने के बाद अपनी डेंटिस्ट बेटी गौरी को वीडियो कॉल करती हैं। वे दिन में दो बार उससे बात करती हैं। बेटी ने ही होस्टल में रहने के लिए उनका हौसला बढ़ाया था।
39 डिग्री में पीपीई किट में रहना, मरीज की हर सांस के लिए लड़ना
शहर में कोरोना के सबसे ज्यादा करीब 425 मरीज अरबिंदो अस्पताल में भर्ती हैं। इनका इलाज लगभग 400 डॉक्टर कर रहे हैं। इनमें से रोज 15-20 की ड्यूटी कोरोना वार्ड में लगाई जाती है।
1. फुर्सत के बस यही कुछ पल, इनमें भी कोरोना की अपडेट

मरीजों का इलाज करने वाली टीम का नेतृत्व रेस्पिरेटरी मेडिसिन एचओडी डॉ. रवि डोसी कर रहे हैं। लॉकडाउन के बाद से ही डॉ. डोसी घर छोड़कर कैंपस में बने होस्टल में शिफ्ट हो गए हैं। घर में माता-पिता, डॉक्टर पत्नी और दो बच्चे हैं। डॉ. डोसी होस्टल में आए तो परिजनने कुछ नहीं कहा, पर मरीज बढ़ने लगे तो उन्हें संक्रमण का डर होने लगा। वे डॉ. डोसी से फोन पर कहते हैं कि घर आ जाओ। डॉ.डोसी हर बार मना कर देते हैं। यहां डॉ. डोसी की दिनचर्या सुबह आठ बजे से शुरू होती है।
2. तैयार होकर आईसीयू का राउंड लेने निकली टीम

अरबिंदो अस्पताल के जिस आईसीयू में कोरोना के संक्रमित मरीजों को रखा गया है, वहां डॉ. डोसी को रोज राउंड लेना होता है। यूनिट के अन्य कंसल्टेंट की ड्यूूटी रोस्टर के हिसाब से लगाई जाती है। उन्हें सात दिन में एक दिन वार्ड का राउंड लेना होता है। डॉक्टरों की टीम पीपीई किट पहनकर आईसीयू में जाती है, जबकि वहां एसी तक बंद रहता है। वहीं इन दिनों गर्मी बढ़ रही है। शुक्रवार को ही तापमान करीब 39 डिग्री था।
3. मरीजों से मिले, रिपोर्ट देखी, इलाज तय किया

अस्पताल में मेडिसिन, एनेस्थीसिया और अन्य विभागों के डॉक्टर भी कोराेना के मरीजों के इलाज में जुटे हैं। रोज शाम को विभाग के कंसल्टेंट की ऑनलाइन मीटिंग होती है। मरीजों के स्टेटस और रिपोर्ट पर चर्चा करते हैं। डॉ. डोसी कभी-कभी सुबह से शाम तक तीन बार राउंड लेते हैं।
4. किट उतारकर दोबारा नहाए

आईसीयू से बाहर आने के बाद डॉ. डोसी खुद को सैनिटाइज करते हैं। पीपीई किट उतारकर दोबारा नहाते हैं। इसके बाद मेडिकल कॉलेज भी जाते हैं।
5. आखिर में...परिवार से की चर्चा

सुबह से शाम तक अस्पताल और कॉलेज के बीच की भागदौड़ के बाद डॉ. डोसी होस्टल लौटते हैं। यहां भोजन के बाद परिजनसे बात करते हैं। उनके माता और पिता भी मेडिकल प्रोफेशनल हैं।
02 डॉक्टरों की हो चुकी है मौत
150डॉक्टर शहर में रेड, यलो कैटेगरी के 17 अस्पतालों में रोज कोरोना के मरीजों के इलाज में जुटते हैं।
100डॉक्टर स्वास्थ्य विभाग के हैं, जो मरीजों का इलाज करने के लिए घर छोड़कर दूसरी जगह ठहरे हैं।
04डॉक्टर, 5 नर्स और 2 टेक्निशियन भी कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं।
02डॉक्टरों की मौत हो चुकी हैं, शहर में कोरोना के कारण।
80%डॉक्टरों ने छुट्टी नहीं ली है, जो कोरोना से निपटने वाली टीम में हैं।
आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
https://ift.tt/2Y4IOis
From Dainik Bhaskar
0 Comments
Please do not enter any Spam Link in the comment box.