कोरोनावायरस के कारण प्रो कबड्डी लीग के आयोजन पर खतरा मंडरा रहा है। मौजूदा सीजन की शुरुआत जुलाई से होनी थी। अप्रैल में खिलाड़ियों का ऑक्शन होना था, लेकिन यह अब तक नहीं हो सका है। आयोजकों को टूर्नामेंट से हर साल लगभग 500 करोड़ रुपए का फायदा होता है। उन्हें यह राशि स्पाॅन्सर की ओर से मिलती है।
पिछले दिनों लीग के आयोजन को लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कबड्डी फेडरेशन की बैठक हुई। इसमें बिना फैंस के नवंबर-दिसंबर में टूर्नामेंट के आयोजन को लेकर चर्चा हुई। अब तक लीग के सात सीजन हो चुके हैं।
एक शहर में आयोजन की तैयारी, 14 दिन क्वारैंटाइन भी
आयोजन पर अंतिम फैसला खेल मंत्रालय और गृह मंत्रालय की ओर सेहरी झंडी मिलने के बाद ही होगा। इसके लिए गाइडलाइन भी बना ली गई है। इसके अनुसार जिस राज्य में कोरोना के मरीजों की संख्या कम होगी, वहां आयोजन किया जाएगा। एक ही शहर में बिना फैंस के पूरा आयोजन कराया जाएगा। सभी खिलाड़ियाें को 14 दिन क्वारैंटाइन में रखा जाएगा। मैच के दौरान सैनिटाइजेशन भी किया जाएगा।
खिलाड़ियों को 50 करोड़ जबकि रेफरी को 90 लाख का नुकसान
लीग में 12 टीम में 200 से अधिक खिलाड़ी शामिल होते हैं। ऑक्शन पर लगभग 50 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। यदि लीग का आयोजन नहीं होता है तो खिलाड़ियों को 50 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। लीग के 5 साल के ब्रॉडकास्टिंग राइट्स 150 करोड़ के हैं। ऐसे में इसमें भी 30 करोड़ का नुकसान संभव है।
लीग में देशभर के 30 रेफरी को शामिल किया जाता है। इन्हें एक सीजन के 3 लाख रुपए मिलते हैं। लीग के नहीं होने पर रेफरी को भी 90 लाख रुपए नहीं मिलेंगे।
आईपीएल के आयोजन पर सबकी निगाहें, इसी से अन्य को उम्मीद
प्रो कबड्डी लीग के आयोजक आईपीएल को हरी झंडी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। यदि टी20 लीग के आयोजन को हरी झंडी मिलती है तो कबड्डी लीग के आयोजन का भी रास्ता साफ हो जाएगा। इसके बाद इंडिया सुपर लीग का भी आयोजन होना है। अधिकांश लीग बिना फैंस के मौजूदा सीजन का आयोजन कराना चाहती हैं। इससे वे आयोजन के साथ-साथ घाटे को कम कर सकेंगी। हालांकि, देश में कोरोना के केस लगातार बढ़ रहे हैं।
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From Dainik Bhaskar
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