बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर बहस जारी है। करीब तीन महीने का वक्त होने को है और अभी तक ये साफ नहीं हो पाया है कि ये हत्या थी या आत्महत्या। इन सबके बीच नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी ने भी सुसाइड को लेकर नया डेटा जारी कर दिया है। इस डेटा के मुताबिक, 2019 में 1.39 लाख से ज्यादा लोगों ने सुसाइड कर अपनी जान गंवा दी। यानी हर दिन 381 और हर घंटे 16 लोग खुदकुशी कर रहे थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में सुसाइड करने वालों का आंकड़ा 2018 की तुलना में 3.4% ज्यादा है। 2018 में 1.34 लाख लोगों ने सुसाइड की थी।
इस स्टोरी में हम ये समझने की कोशिश करेंगे कि सुसाइड करने वाले कौन लोग थे? उनकी उम्र-जेंडर क्या था? उनके सुसाइड करने का कारण क्या था? किस राज्य में सबसे ज्यादा सुसाइड के मामले आए?
सबसे पहले बात, सुसाइड करने वाले कौन थे?
- पिछले साल सुसाइड करने वाले 23.4% लोग दिहाड़ी मजदूरी करते थे। ऐसे 32 हजार 563 लोगों ने खुदकुशी कर ली। दिहाड़ी मजदूरों के बाद घर का काम संभालने वालीं हाउस वाइफ ने सबसे ज्यादा जान गंवाई। 2019 में देशभर में 21 हजार 359 हाउस वाइव्स ने सुसाइड कर ली।
- सुसाइड करने वालों में 14 हजार से ज्यादा लोग बेरोजगार थे। 10 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स ने भी आत्महत्या कर ली। इन सबके अलावा खेती-किसानी से जुड़े 10 हजार 281 लोगों ने भी सुसाइड कर जान दे दी।
- 2019 में देशभर में 72 मामले मास या फैमिली सुसाइड के भी दर्ज किए गए, जिनमें 180 लोगों ने जान दे दी। सबसे ज्यादा 16 मामले तमिलनाडु में आए थे, जिनमें 43 लोगों की जान गई।

सुसाइड करने का कारण क्या था?
- अक्सर लोगों का मानना होता है कि सुसाइड के पीछे खराब आर्थिक हालत वजह होती होगी या फिर बेरोजगारी। लेकिन ऐसा नहीं है। एनसीआरबी के मुताबिक, पिछले साल जितने लोगों ने सुसाइड किया, उनमें से सबसे ज्यादा 32.4% ने परिवार की दिक्कतों से तंग आकर आत्महत्या कर ली। 2019 में 45 हजार 140 लोगों ने परिवार की दिक्कतों की वजह से सुसाइड की।
- सुसाइड का दूसरा बड़ा कारण बीमारी है। पिछले साल 23 हजार 830 लोगों ने बीमारी से परेशान होकर सुसाइड कर ली। इससे पता चलता है कि देश में अभी भी एक तबके तक स्वास्थ्य सेवाएं नहीं पहुंच पा रही हैं।
- तीसरा बड़ा कारण ड्रग एडिक्शन है, जिसकी वजह से पिछली साल 7 हजार 860 लोगों ने आत्महत्या कर ली। वहीं बेरोजगारी की वजह से 2 हजार से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवाई।

सुसाइड करने वालों में 70% पुरुष
- पिछली साल सुसाइड करने वाले 1.39 लाख लोगों में से 70% से ज्यादा पुरुष थे। 2019 में पुरुषों ने 97 हजार 613 पुरुष और 41 हजार 493 महिलाएं थीं। जबकि, 17 ट्रांसजेंडर ने भी सुसाइड की।
- सबसे ज्यादा सुसाइड 18 से 30 साल की उम्र के लोगों ने की। इस एज ग्रुप के 48 हजार 774 लोगों ने सुसाइड की थी। जबकि, 45 साल से ऊपर 36 हजार 449 लोगों ने आत्महत्या कर ली थी।

करीब 50% सुसाइड सिर्फ 5 राज्यों में
- 2019 में सुसाइड के 49.5% मामले सिर्फ 5 राज्यों में ही दर्ज किए गए। इनमें सबसे ज्यादा 13.6% मामले महाराष्ट्र में सामने आए।
- बाकी 50.5% मामले देश के बचे 24 राज्य और 7 केंद्र शासित प्रदेशों में मिले। एकमात्र लक्षद्वीप ही ऐसा था, जहां सुसाइड का एक भी मामला नहीं आया।

5 साल में कितने बढ़ गए सुसाइड के मामले?
- 2015 में देश में 1.33 लाख से ज्यादा सुसाइड के मामले दर्ज किए गए थे। 2019 में यह आंकड़ा 1.39 लाख के पार पहुंच गया। यानी पिछले पांच साल में खुदकुशी के मामलों में 4% से ज्यादा का इजाफा हो गया है।
- एनसीआरबी का डेटा बताता है कि 2016 और 2017 में सुसाइड के मामलों में कमी आई थी। 2016 में 1.31 लाख और 2017 में 1.29 लाख लोगों ने सुसाइड की थी। लेकिन, 2018 और 2019 में मामले बढ़ गए। 2018 में 1.34 लाख मामले आए थे।

सुसाइड के मामले में भारत पहले नंबर पर
पिछले साल डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट आई थी। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि साउथ-ईस्ट एशियाई देशों में भारत में सुसाइड रेट सबसे ज्यादा है। डब्ल्यूएचओ ने 2016 के डेटा के आधार पर ये रिपोर्ट जारी की थी। इसके मुताबिक, भारत में एक लाख आबादी पर 16.5 लोग सुसाइड कर लेते हैं। दूसरे नंबर पर श्रीलंका है, जहां एक लाख में 14.6 लोग खुदकुशी कर लेते हैं।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, दुनियाभर में हर साल 8 लाख से ज्यादा लोग सुसाइड करते हैं, यानी हर 40 सेकंड में एक सुसाइड।
आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
https://ift.tt/2R6zqq1
From Dainik Bhaskar
0 Comments
Please do not enter any Spam Link in the comment box.